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अब MAaDHAAR App में होगी ऑफलाइन eKYC पेपरलेस kya hain fayde

mAadhaar App में पेपरलेस ऑफलाइन वेरीफिकेशन करने के लिए, आपको निम्नलिखित चरणों का पालन करना होगा: अपने एंड्रॉइड या iOS डिवाइस पर mAadhaar App डाउनलोड और इंस्टॉल करें। App खोलें और अपना रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर और OTP दर्ज करें। लॉग इन करने के बाद, "सर्विसेज" टैब पर टैप करें। "आधार सेवाएं" पर टैप करें। "पेपरलेस ऑफलाइन eKYC" पर टैप करें। आधार नंबर दर्ज करें। शेयर कोड दर्ज करें। सिक्योरिटी कैप्चा दर्ज करें। "Request OTP" बटन पर टैप करें। ओटीपी दर्ज करें और "Verify" बटन पर टैप करें। इसके बाद, आपका पेपरलेस ऑफलाइन eKYC दस्तावेज़ तैयार हो जाएगा। आप इसे "Share eKYC" बटन पर टैप करके किसी भी संगठन या सेवा प्रदाता के साथ साझा कर सकते हैं। पेपरलेस ऑफलाइन eKYC दस्तावेज़ में निम्नलिखित जानकारी शामिल होगी: आधार नंबर नाम जन्म तिथि लिंग पता फोटो यह दस्तावेज़ एक सुरक्षित साझा करने योग्य दस्तावेज़ है जिसका उपयोग ऑफलाइन सत्यापन के लिए किया जा सकता है। ध्यान दें कि पेपरलेस ऑफलाइन eKYC दस्तावेज़ में आपका बायोमेट्रिक डेटा शामिल नहीं हो...

पूजा स्थल में दिया जलाने से मिलाता है ये लाभ ....

पूजा-पाठ के समय दीपक जलाना सर्वोतम माना गया है। पुराने समय में मिट्टी के दीये जलाये जाते थे लेकिन अब लोग धातु के दीये भी जलाने लगे हैं। दिया जलाने को लेकर धारणा है कि इससे घर का अंधकार दूर होता है। आज मैं आपको दिया (दीप) जलाने के लाभ बताने की एक छोटी सी कोशिश कर रहा हूँ क्यूंकि इतना ज्ञानी तो नहीं हूँ मगर जितना मेरी बुद्धि और विचार पठन-पठान से ज्ञान अर्जित हुवा है उसी आधार पर यह पोस्ट लिख रहा हूँ । आशा है की आपको जरुर पसंद आएगी ये पोस्ट .  क्या होता है जब हम दिया जलाते हैं : दीपक घर से बीमारियों को भी दूर करने में मददगार होता है।   दीपक के साथ जब एक लौंग जलाते हैं तो इसका दोगुना असर होता है।  घी में चर्मरोग दूर करने के भी गुण होता है। इस कारण माना जाता है कि घी का दीपक जलाने से घर के रोग दूर भागते हैं।  प्रदूषण दूर करने में इसका महत्वपूर्ण स्थान है।    दिया जलाने के प्रमुख्य लाभ : अगर आप दीपक घी या तेल(सरसों) का जलाते हो फिर भी दीपक के ज्योत का धुंआ घर के लिए वातावरण को शुद्ध करने का काम करता है। घी और तेल की सुगंध घर के हानिकारक तत्वों को बाहर कर उदासीनता ...

अष्टगंध का एक रूप (जटामांसी) Ashtgandh jatamasi आप नहीं जानते होंगे इसके औषधीय गुणों के बारे में?

भगवान के पूजन के लिए अनेक प्रकार की सामग्री उपयोग में लाई जाती है।अष्टगंध उन्हीं में से एक है अष्टगन्ध। अष्टगंध के रूप में इन आठ पदार्थ को मानते है-चन्दन, अगर, ह्रीवेर, कुष्ठ, कुंकुम, सेव्यका, जटामांसी, मुर। ये आठ जड़ीबूटियां ऐसी है जिन्हें देवताओं की भी प्रिय मानी जाती है। इनमें से जटामांसी एक औषधीय गुणों से भरी जड़ीबूटी है। इस जड़ को आयुर्वेदिक में बहुत गुणकारी और उपयोगी माना गया है आइए जानते है जटामासी के कुछ आयुर्वेदिक प्रयोग - एक चम्मच जटामासी में शहद का घोल मिला कर इसका सेवन करने से ब्लडप्रेशर को ठीक करके सामान्य स्तर पर लाया जा सकता है। - दांतों में दर्द हो तो जटामासी के महीन पाउडर से मंजन कीजिए। - इसका शरबत दिल को मजबूत बनाता है, और शरीर में कहीं भी जमे हुए कफ को बाहर निकालता है। - मासिक धर्म के समय होने वाले कष्ट को जटामासी का काढ़ा खत्म करता है। - मस्तिष्क और नाड़ियों के रोगों के लिए ये रामबाण औषधि है, ये धीमे लेकिन प्रभावशाली ढंग से काम करती है। - पागलपन , हिस्टीरिया, मन बेचैन होना, याददाश्त कम होना,इन सारे रोगों की यही अचूक दवा है। - ये त्रिदोष को भी शांत करती है और सन्निपा...

जानें Panch Kedar की पौराणिक कथा हमें क्या सिख देती है, क्या है पंच रूपों का वर्णन व महत्व ?

उत्तराखंड में कुल पांच केदार हैं, जिन्हें पंच केदार के नाम से जाना जाता है। ये पांच मंदिर भगवान शिव को समर्पित हैं और हिमालय की गोद में स्थित हैं। केदारनाथ: यह मंदिर उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में स्थित है। यह बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है और भगवान शिव के सदाशिव रूप को समर्पित है। तुंगनाथ: यह मंदिर उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित है। यह भगवान शिव के भुजंग रूप को समर्पित है। मध्यमहेश्वर: यह मंदिर उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में स्थित है। यह भगवान शिव के नाभि रूप को समर्पित है। रुद्रनाथ: यह मंदिर उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित है। यह भगवान शिव के मुख रूप को समर्पित है। कल्पेश्वर: यह मंदिर उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित है। यह भगवान शिव के शीर्ष रूप को समर्पित है। पंच केदार की तीर्थयात्रा एक महत्वपूर्ण धार्मिक यात्रा है जो हर साल हजारों श्रद्धालुओं द्वारा की जाती है। यह यात्रा आमतौर पर चार धाम यात्रा के साथ की जाती है। पंच केदार के बारे में एक लोकप्रिय पौराणिक कथा है कि जब पांडवों ने महाभारत के युद्ध में अपने सगे-संबंधियों को मार दिया, तो उन्होंने भगवान ...

भारत का आखरी गाँव Mana Aur Bhim Pool का रहस्य

भारत का आखरी गॉंव माणा जिसे मणिभद्रपुरी के नाम से भी जाना जाता है।माणा सुन्दर शांत वातावरण की एक मिशाल है यहाँ से कुछ ही दुरी पर सरस्वती नदी है इस पर बने पुल को भीम पुल के नाम से जाना जाता है। मान्यता है की जब पाण्डव स्वर्ग को जा रहे थे तो उन्होंने सरस्वती नदी से आगे जाने के लिए रास्ता माँगा क्युंकि सरस्वती नदी अपने पूर्ण वेग पर थी और सरस्वती जी ने उन्हें मार्ग नहीं दिया जिस कारणवस् भीम ने दो विशाल शिलाओं को नदी के ऊपर पुल स्वरुप रख दिया जिससे इस पुल का नाम सदा के लिए भीम पुल पड़ गया। सरस्वती नदी से कुछ ही दूर अलकनन्दा नदी है और सरस्वती नदी अलकनन्दा में लीन हो जाती है। सरस्वती नदी का समागम स्थल ज्ञात नहीं होता केवल नदी नीचे की ओर जाती दिखती मात्र है। कहा जाता है की भीम ने जब अपनी गदा को जमीन पर मारा तो यह नदी पाताल में चली गयी। सरस्वती नदी के बारे में एक दन्त कथा है की जब गणेश जी वेद लिख रहे थे तो नदी का शोर उन्हें विचलित कर रहा था उन्होंने सरस्वती जी से अपने वेग को कम कर शांत होने को कहा मगर नदी का शोर कम ना हुआ तभी गणेश जी ने उन्हें श्राप दिया की इससे आगे आप किसी को नजर नह...

Digital Locker अब यहॉं ऑनलाइन मिलेंगे आपके दस्तावेज

अब आपको अपने जरूरी दस्तावेज साथ ले जाने की जरूरत नहीं है. क्योंकि सरकार ने एक डिजिटल लॉकर लॉन्च किया है जहां आप पासपोर्ट, जन्म प्रमाण पत्र, शैक्षणिक प्रमाण पत्र, पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेज ऑनलाइन स्टोर कर सकते हैं! डिजिटल लॉकर हर वह व्यक्ति ले सकता है जिसके पास आधार कार्ड है क्योंकि डिजिटल लॉकर खोलने के लिए आपको यह करना होगा आपको http://digitallocker.gov.in/ वेबसाइट पर जाकर अपनी आईडी बनानी होगी और आईडी बनाने के लिए आधार नंबर की जरूरत होगी, इसलिए आधार कार्ड का होना जरूरी है! इस सुविधा की खास बात यह है कि एक बार जब आप अपने दस्तावेज लॉकर में अपलोड कर देंगे तो उसके बाद आपको अपने प्रमाणपत्र की मूल प्रति कहीं भी देने की जरूरत नहीं पड़ेगी! इसके लिए आपके डिजिटल लॉकर का लिंक ही काफी होगा! सरकार का कहना है कि डिजिटल लॉकर में अपलोड किया गया डेटा सुरक्षित रहेगा क्योंकि ऑनलाइन डेटा विदेशी सर्वर पर नहीं रखा जाएगा! इसके अलावा सुरक्षा के लिए एक और कदम उठाया गया है, जिसके तहत आधार कार्ड पर दिए गए मोबाइल नंबर पर वन टाइम पासवर्ड भेजा जाएगा. जब आप अपने कंप्यूटर पर डिजिटल लॉकर म...

जानें सर्वार्थसिद्धि, अमृतसिद्धि, गुरुपुष्यामृत और रविपुष्यामृत योग का महत्व

सर्वार्थसिद्धि, अमृतसिद्धि, गुरुपुष्यामृत और रविपुष्यामृत योग शुभ मुहूर्तों में स्वर्ण आभूषण, कीमती वस्त्र आदि खरीदना, पहनना, वाहन खरीदना, यात्रा आरम्भ करना, मुकद्दमा दायर करना, ग्रह शान्त्यर्थ रत्न धारण करना, किसी परीक्षा प्रतियोगिता या नौकरी के लिए आवेदन-पत्र भरना आदि शुभ मुहूर्त जानने के किए अब आपको पूछने के लिए किसी ज्योतिषी के पास बार-बार जाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी । सर्वार्थसिद्धि, अमृतसिद्धि, गुरुपुष्यामृत और रविपुष्यामृत योग वारों का विषेश नक्षत्रों से सम्पर्क होने से ये योग बनते हैं । जैसे कि इन योगों के नामों से स्पष्‍ट है, इन योगों के समय में कोई भी शु्भ कार्य आरम्भ किया जाय तो वह निर्विघ्न रूप से पूर्ण होगा ऐसा हमारे पूर्वाचार्यों ने कहा है ।  यात्रा, गृह प्रवेश, नूतन कार्यारम्भ आदि सभी कार्यों के लिए या अन्य किसी अपरिहार्य कारणवश यदि व्यतिपात, वैधृति, गुरु-शुक्रास्त, अधिक मास एवं वेध आदि का विचार सम्भव न हो तो सर्वार्थसिद्धि आदि योगों का आश्रय लेना चाहिये ।  अमृतसिद्धि योग अमृतसिद्धि योग रवि को हस्त, सोम को मृगशिर, मंगल को अश्‍विनी, बुध को अनुराधा, गुरु को पुष्य ...