मां पूर्णागिरि के दरबार में हर मन्नत पूरी होती है पूरी पूर्णागिरी मंदिर का इतिहास हिमालय की गोद में स्थित उत्तराखण्ड राज्य के कण-कण में देवी-देवताओं का वास होने के चलते इसे देवभूमि के नाम से जाना जाता है | यहाँ हिंदू धर्म के बहुत से धार्मिक स्थल हैं इन्ही स्थलों में से एक है “माँ पूर्णागिरी” का दरबार. पूर्णागिरि माता का मंदिर उत्तराखंड में टनकपुर से 22 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. माँ पूर्णागिरि का मंदिर चंपावत जिले में समुद्र तल से 3000 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। माँ पूर्णागिरि का मंदिर काली नदी के तट पर स्थित है जो की 108 सिद्ध पीठों में से एक है। हर साल नवरात्र के दौरान (मार्च के महीने में) यहां मेले का आयोजन किया जाता है. इस मेले में आस-पास के इलाकों और दूसरे प्रदेशों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु देवी पूर्णागिरि के दर्शन और पूजा के लिए पहुंचते हैं। हर साल मार्च के महीने में भक्तों के आने का सिलसिला लगा रहता है। चैत्र नवरात्र से शुरू होने वाला मां पूर्णागिरी का यह मेला जून माह तक चलता है। पूर्णागिरी मंदिर भारत- नेपाल बॉर्डर पर पड़ता है। पूर्णागिरी का मंदिर हरे-भरे पहाडों से घिरा हु...