सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

संदेश

अगस्त, 2023 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

New Feature अब कोई दूसरा नहीं खोल पाएगा आपका WhatsApp

लाख कोशिशों के बाद भी कोई दूसरा नहीं खोल पाएगा आपका WhatsApp, ऐप इंस्टॉल करते समय बदलें सेटिंग अगर आप मेटा के लोकप्रिय चैटिंग ऐप का इस्तेमाल करते हैं तो यह आर्टिकल आपके काम का हो सकता है। WhatsApp एक निजी खाता है। इस अकाउंट पर यूजर के पर्सनल के साथ-साथ प्रोफेशनल चैट भी होते हैं। ऐसे में अगर यूजर का फोन दूसरे के हाथ में आ जाए तो एक टैप पर यह जानकारी सामने आ सकती है। यूजर की इसी जरूरत को समझते हुए वॉट्सऐप पर अकाउंट सिक्यॉरिटी के लिए लॉक का ऑप्शन उपलब्ध है। WhatsApp का फिंगरप्रिंट लॉक क्या है, कैसे करता है काम? WhatsApp यूजर के लिए प्रिवेसी फीचर पेश करता है। इन प्राइवेसी फीचर्स में फिंगरप्रिंट लॉक भी है। फिंगरप्रिंट लॉक की मदद से वॉट्सऐप को लॉक किया जा सकता है। यानी अगर आपकी डिवाइस किसी दूसरे यूजर के हाथ में है तो भी आपकी पर्सनल और प्राइवेट चैट्स को पढ़ा नहीं जा सकता है। फिंगरप्रिंट लॉक इनेबल होने पर वॉट्सऐप खोलने के लिए अपनी उंगली का इस्तेमाल करना जरूरी होता है। WhatsApp पर फिंगरप्रिंट लॉक कैसे करें? व्हाट्सएप पर फिंगरप्रिंट लॉक को सक्षम करने के लिए, सबसे पहले आपको ऐप खोलना होगा। मुख्य प...

RakshaBandhan रात में नहीं मनाना: तो दिन में राखी बांधने का शुभ समय जान लें।

रक्षा बंधन रात में नहीं मनाया जाता है तो दिन में राखी बांधने का शुभ समय जान लें। रक्षा बंधन 2023 तिथि राखी मुहूर्त इस साल भद्रा के कारण रक्षा बंधन का त्योहार 30 अगस्त और 31 अगस्त को मनाया जा रहा है। राखी बांधने का शुभ समय 30 अगस्त को रात 9 बजे के बाद है, लेकिन जो लोग रात में रक्षाबंधन नहीं मनाना चाहते, वे दिन में भी रक्षाबंधन का त्योहार मना सकते हैं, लेकिन वह दिन 31 अगस्त का होगा. उस दिन आप भद्रा के भय से मुक्त हो जाएंगे और पूरे दिन राखी बांधने का शुभ समय मिलेगा। जानते हैं 30 और 31 अगस्त को कब से है रक्षाबंधन का शुभ मुहूर्त? 31 अगस्त को पूरे दिन रक्षाबंधन मुहूर्त है रक्षाबंधन का त्योहार सदैव सावन पूर्णिमा की उदया तिथि पर मनाना उचित रहता है। इस साल सावन पूर्णिमा की उदया तिथि 31 अगस्त, गुरुवार को है। ऐसे में 31 अगस्त को भी रक्षाबंधन मनाना ठीक है. 31 अगस्त को राखी बांधने का शुभ समय सुबह 05:55 बजे से सुबह 07:05 बजे तक है. रक्षाबंधन के लिए यह सबसे अच्छा शुभ समय है। इसके बाद आप सुबह 08:12 बजे से शाम 05:42 बजे के बीच कभी भी राखी बांध सकती हैं । इस दौरान रक्षाबंधन मनाने से कोई दोष नहीं लगेगा. ...

Tulsi Puja के लिए रविवार को क्यों अशुभ माना जाता है

तुलसी पूजा रविवार को क्यों नहीं की जाती?  तुलसी हिंदू धर्म में एक पवित्र पौधा है और इसे भगवान विष्णु की पत्नी देवी लक्ष्मी का अवतार माना जाता है। तुलसी पूजा हर दिन तुलसी के पौधे की पूजा करने और उसे जल चढ़ाने का एक अनुष्ठान है। हालाँकि, कुछ दिन और समय ऐसे भी होते हैं जब तुलसी पूजा वर्जित होती है या टाली जाती है। आइए मैं इसके पीछे के कारण बताता हूं। कुछ धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान विष्णु को तुलसी बहुत प्रिय है और इसकी पूजा से वे प्रसन्न होते हैं। वैसे तो गुरुवार विष्णु पूजा के लिए सबसे शुभ दिन है, लेकिन कुछ लोग रविवार को भी उनका पसंदीदा दिन मानते हैं। वहीं तुलसी भी विष्णु भक्त हैं और रविवार के दिन उनकी भक्ति में लीन रहती हैं। उनकी साधना में विघ्न न पड़े इसलिए रविवार को तुलसी पूजा नहीं की जाती। यह भी कहा जाता है कि रविवार को तुलसी के पौधे को पानी देने से भगवान विष्णु नाराज हो सकते हैं और भक्त पर दुर्भाग्य आ सकता है। रविवार को तुलसी पूजा न करने का एक अन्य कारण यह है कि रविवार का स्वामी सूर्य देव हैं, जिन्हें पौधों के स्वामी शनि का शत्रु माना जाता है। चूंकि तुलसी एक पौधा है, इसल...

Parma Ekadashi Vrat सुख-समृद्धि और ऐश्वर्य प्रदान करता है

परमा एकादशी व्रत एक महत्वपूर्ण हिंदू व्रत है जो हर साल ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को रखा जाता है. यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है और इसे रखने से सभी पापों से मुक्ति मिलती है और मोक्ष की प्राप्ति होती है. परमा एकादशी व्रत की कथा के अनुसार, एक बार एक राजा थे जिनका नाम धर्मपाल था. वे बहुत धार्मिक और पुण्यात्मा थे. एक दिन उन्होंने एक ऋषि से परमा एकादशी व्रत के बारे में सुना. ऋषि ने उन्हें बताया कि यह व्रत बहुत ही शक्तिशाली है और इसे रखने से सभी पापों से मुक्ति मिलती है. राजा धर्मपाल ने ऋषि के बताए अनुसार परमा एकादशी व्रत रखा. उन्होंने व्रत के दिन उपवास किया और भगवान विष्णु की पूजा की. उन्होंने भगवान विष्णु से प्रार्थना की कि वे उन्हें सभी पापों से मुक्ति दिलाएं और मोक्ष प्रदान करें. व्रत के बाद राजा धर्मपाल को स्वर्ग की प्राप्ति हुई. वे सभी पापों से मुक्त हो गए और मोक्ष प्राप्त कर लिया. परमा एकादशी व्रत रखने के कुछ नियम हैं. इस व्रत को रखने वाले व्यक्ति को एक दिन पहले से ही सात्विक भोजन करना शुरू कर देना चाहिए. व्रत के दिन सुबह उठकर स्नान करना चाहिए और भगवान विष्णु की पूजा कर...

Raksha Bandhan पर बहन को राशि के अनुसार दें Gift

रक्षाबंधन पर अपनी बहन को राशि के अनुसार ऐसे उपहार दें हिंदू कैलेंडर के अनुसार श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन रक्षाबंधन मनाया जाता है। यह त्यौहार भाई-बहन के प्यार का प्रतीक माना जाता है। रक्षाबंधन के दिन बहनें अपने भाई की कलाई पर रक्षासूत्र बांधती हैं और सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। वहीं, भाई अपनी बहन की रक्षा करने का वादा करता है और उसे उपहार के रूप में पैसे देता है। लेकिन ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस राखी पर आपको अपनी बहन को उसकी राशि के अनुसार क्या उपहार देना चाहिए? जिससे उनके जीवन में सुख और समृद्धि बनी रहे। आइए जानते हैं कि एक भाई को अपनी बहनों को राशि के अनुसार क्या उपहार देना चाहिए। मेष राशि का स्वामी बृहस्पति मंगल है। इस राशि का शुभ रंग लाल है। ऐसे में आप रक्षाबंधन के दिन अपनी बहन को लाल रंग की कोई चीज गिफ्ट कर सकते हैं। जो अत्यंत शुभ रहेगा. वृषभ राशि का स्वामी बृहस्पति है। इस राशि का शुभ रंग सफेद और सिल्वर है। अगर आप रक्षाबंधन में अपनी बहन को उपहार देने की सोच रहे हैं तो आप सफेद या चांदी से जुड़ी चीजें उपहार में दे सकते हैं। मिथुन राशि के स्वामी बृहस्पति, बुध हैं। इस राशि की ब...

आज जानेंगे क्यों थी Bhagwan Krishan की 16,000 पत्नियां

शास्त्रों में इस बात का उल्लेख है कि भगवान कृष्ण की 16,000 पत्नियां थी। वास्तव में उनकी 16,108 पत्नियां थी। हम सभी जानते हैं कि प्राचीन काल में बहुविवाह प्रथा बहुत लोकप्रिय थी, फिर भी 16,108 की संख्या बहुत अधिक लगती है। राधा के साथ उनका आत्मिक प्रेम, आठ सुन्दर राजकुमारियों से विवाह तथा फिर भी 16,000 और अधिक पत्नियां निश्चित रूप से हमें आश्चर्यचकित कर यह जानने के लिए मजबूर कर देते हैं कि इन सब के पीछे क्या कारण होगा। यदि हम शास्त्रों में देखें तो हम देखेंगे कि भगवान कृष्ण ने राधा से कभी भी विवाह नहीं किया था। परन्तु उन्होंने आठ महिलाओं से शादी की। उनकी आठ पत्नियों के नाम रुक्मिणी, सत्यभामा, जाम्बवती, कालिंदी, मित्रविंदा, नाग्नाजिती, भद्रा और लक्ष्मणा थे। उनमें से सत्यभामा और रुक्मिणी प्रसिद्ध हैं। अब 16,000 पत्नियों की कहानी की ओर बढ़ते हैं। हम सभी जानते हैं कि भगवान कृष्ण एक चमत्कारी राजा थे। उनके साथ जो कुछ भी हुआ उसके पीछे कोई न कोई कारण था। अत: यह कहना सही नहीं होगा कि 16,108 पत्नियां कृष्ण लीला का एक हिस्सा थी। अत: ऐसी क्या परिस्थिति हुई कि भगवान कृष्ण को 16,000 महिलाओं से विवाह करन...

जानें क्या है Chota Char Dham का महत्व

उत्तराखंड में स्थित बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री तथा यमुनोत्री को “छोटा चार धाम” कहा जाता है। इन चारों धार्मिक स्थलों की अलग-अलग मान्यताएं हैं। यह चार धाम एक ही राज्य में होने के कारण भक्तों के लिए सुगम माने जाते हैं। माता दुर्गा और शिवजी से संबद्ध रखने वाले पर इन धार्मिक स्थलों को हिंदू श्रद्धालु पवित्र मानते हैं। मान्यता है कि चार धामों की पवित्र यात्रा व दर्शन करने से सभी पापों का नाश होता है। साथ ही मनुष्य जीवन-मृत्यु के बंधनों से मुक्त हो जाता है। छोटा चार धाम की यात्रा के दौरान सबसे पहले यमुनोत्री (यमुना) व गंगोत्री (गंगा) के दर्शन करते है तथा पवित्र जल लेकर केदारेश्वर का अभिषेक करते हैं। यमुनोत्री (Yamunotri) यमुनोत्री उत्तराखंड के बेहद प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों में से एक है। यह छोटा चार धाम यात्रा का पहला पड़ाव है। मान्यता है कि यमुना सूर्य की पुत्री और यम उनका पुत्र है। कहा जाता है कि यमुना में स्नान किए लोगों के साथ यमराज सख्ती नहीं बरतते। यमराज को मौत का देवता माना जाता है। यमुना में स्नान करने से मृत्यु का भय दूर हो जाता है। मंदिर के पास गरम पानी के कई सोते है, जिसमें सूर्य कु...