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संदेश

2019 Merry Christmas Wishes in Hindi for Facebook, Mobile SMS, WhatsApp. मैरी क्रिसमस

मेरी क्रिसमस संदेश 2019 Merry Christmas Wishes in Hindi for WhatsApp. Facebook, Mobile SMS, Messages शुभकामनाएं Christmas Message Hindi  खुशहाली भर जाए आपके जीवन में सारी खुशिया आपको मिल जाये बस करते है बार बार यही दुआए इसलिए आपको क्रिसमस की ढेर सारी शुभकामनाये Christmas Message Hindi  क्रिसमस ट्री के जरिये ये पैगाम भेजा है मुबारक हो आपको क्रिसमस,ये सलाम भेजा है कर लेना तोहफा कबूल हमारी आपके खुशिया से सारी खुशिया है हमारी Christmas Message Hindi  क्रिसमस का उमंग और उत्साह, हमेशा आपके जीवन को, खुशियों से सराबोर रखे !  Christmas Message Hindi  इस क्रिसमस आपका जीवन क्रिसमस ट्री की तरह, हरा भरा और भविष्य तारों की तरह चमचमाता रहे! Christmas Message Hindi  देवदूत बनके कोई आएगा, सारी आशाएं तुम्हारी, पूरी करके जायेगे, क्रिसमस के इस शुभ दिन पर, तौफे खुशियों के दे जायेगा! Christmas Message Hindi  रब ऐसी क्रिसमस बार-बार लाये, क्रिसमस पार्टी में चार चाँद लग जाये, सांता क्लॉज़ से हर दिन मिलवायें, और हर दिन आप नए-नए तौफे पायें! हैप्पी क्रिसमस 2019 Christ...

बसंत पंचमी का त्योहार देवी सरस्वती का जन्मदिन और महत्व !

बसंत पंचमी का त्योहार : हमारे देश में  बसंत पंचमी का त्योहार  बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। बसंत पंचमी के दिन ज्ञान की अधिष्ठात्री देवी सरस्वती देवी का जन्म हुआ था इसलिए इस दिन देवी सरस्वती की पूजा-अर्चना की जाती है। पुरातन युग में इस दिन राजा सामंतो के साथ हाथी पर बैठकर नगर का भ्रमण करते हुए देवालय पहुँचते थे। वहाँ विधिपूर्वक कामदेव की पूजा की जाती थी और देवताओं पर अन्न की बालियाँ चढ़ाई जाती थीं।  बसंत पंचमी पर हमारी फसलें-गेहूँ¸चना¸जौ आदि तैयार हो जाती हैं इसलिए इसकी खुशी में हम बसंत पंचमी का त्योहार मनाते हैं। संध्या के समय बसंत का मेला लगता है जिसमें लोग परस्पर एक-दूसरे के गले से लगकर आपस में स्नेह¸मेल-जोल तथा आनंद का प्रदर्शन करते हैं। कहीं-कहीं पर बसंती रंग की पतंगें उड़ाने का कार्यक्रम बड़ा ही रोचक होता है। इस पर्व पर लोग बसंती कपड़े पहनते हैं और बसंती रंग का भोजन करते हैं तथा मिठाइयाँ बाँटते हं। ऋतुराज बसंत का बड़ा महत्व ? ऋतुराज बसंत का बड़ा महत्व है। इसकी छटा निहारकर जड़-चेतन सभी में नव-जीवन का संचार होता है सभी में अपूर्व उत्साह और आनंद की तरंगे दौड़ने लगती है। ...

नवरात्र: बरकत को घर में न्यौता देने के लिए करें ये उपाय

नवरात्र: बरकत को घर में न्यौता देने के लिए करें ये उपाय नवरात्र का आरंभ हो गया है, घर-घर विराजेंगी माता रानी। बृहस्पतिवार से आरंभ होने के कारण मां पालकी पर सवार होकर आ गई हैं। विद्वानों का मानना है की पालकी पर नव दुर्गा के आने का अर्थ है खर्च ज्यादा यानि इस लक्ष्मी अस्थिर रहने वाली है। आय से ज्यादा व्यय होगा, प्राकृतिक आपदा के योग भी बन रहे हैं। घर की बरकत और पॉजीटिव एनर्जी बढ़ाने के लिए करें ये उपाय- नवरात्र के प्रथम दिवस घर में सुख और शांत वातावरण की स्थापना के लिए उत्तर पूर्वी कोने मे हल्दी से स्वास्तिक बनाएं। धार्मिक शास्त्रों में स्वस्तिक को धन की देवी लक्ष्मी का प्रतीक कहा गया है। कुमकुम और हल्दी को मिलाकर घर की दाएं और बाएं तरफ स्वास्तिक बनाएं। मुख्यद्वार को अच्छे से साफ करके सफेद रंग से रंगोली और स्वास्तिक बनाएं। जिस घर में ये काम प्रतिदिन होता है, विशेषकर उत्सव और त्यौहारों के दिन उस घर से दैवीय शक्तियां बहुत प्रसन्न होती हैं और सदा वहां खुशी-खुशी वास करती हैं। दिल में बसी कामनाओं की पूर्ती के लिए स्वास्तिक बनाकर उस पर देवी मां का स्वरूप या चित्रपट स्थापित करके पूजा करें। घर के...

जानिए, क्या है पूजा-पाठ करने का असल संदेश

                                       जानिए, क्या है पूजा-पाठ करने का असल संदेश काशी में गंगा के किनारे एक संत का आश्रम था। उसमें कई शिष्य अध्ययन करते थे। आखिर वह दिन आया जब शिक्षा पूरी होने के बाद गुरुदेव उन्हें अपना आशीर्वाद देकर विदा करने वाले थे। सुबह गंगा में स्नान करने के बाद गुरुदेव और सभी शिष्य पूजा करने बैठ गए। सभी ध्यानमग्न थे कि एक बच्चे की बचाओ-बचाओ की आवाज सुनाई पड़ी। बच्चा नदी में डूब रहा था। आवाज सुनकर गुरुदेव की आंखें खुल गईं। उन्होंने देखा कि एक शिष्य पूजा छोड़कर बच्चे को बचाने के लिए नदी में कूद गया। वह किसी तरह बच्चे को बचाकर किनारे ले आया लेकिन दूसरे शिष्य आंखें बंद किए ध्यानमग्न थे। पूजा खत्म होने के बाद गुरुदेव ने उन शिष्यों से पूछा, ‘‘क्या तुम लोगों को डूबते हुए बच्चे की आवाज सुनाई पड़ी थी?’’ शिष्यों ने कहा, ‘‘हां गुरुदेव, सुनी तो थी।’’ गुरुदेव ने कहा, ‘‘तब तुम्हारे मन में क्या विचार उठा था?’’ शिष्यों ने कहा, ‘‘हम लोग ध्यान में डूबे थे। दूसरी तरफ ध्यान देने की बात ...

सबसे पुराना Shaktipeeth लगता है tantrics and Aghoris का मेला

कामाख्या मंदिर – सबसे पुराना शक्तिपीसबसे पुराना शक्तिपीठ ठ – यहाँ होती हैं योनि कि पूजा, लगता है तांत्रिकों व अघोरियों का मेला Kamakhya Temple Story & History in Hindi  : कामाख्या मंदिर असम के गुवाहाटी रेलवे स्टेशन से 10 किलोमीटर दूर नीलांचल पहाड़ी पर स्थित है। यह मंदिर देवी कामाख्या को समर्पित है। कामाख्या शक्तिपीठ 52 शक्तिपीठों में से एक है तथा यह सबसे पुराना शक्तिपीठ है। जब सती  के  पिता  दक्ष  ने अपनी पुत्री सती और उस के पति शंकर को यज्ञ में अपमानित किया और शिव जी को अपशब्द  कहे तो सती ने दुःखी हो कर आत्म-दहन कर लिया। शंकर  ने सती कि  मॄत-देह को उठा कर संहारक नृत्य किया। तब सती के  शरीर  के 51 हिस्से अलग-अलग जगह पर गिरे जो 51 शक्ति पीठ कहलाये। कहा जाता है सती का योनिभाग कामाख्या में गिरा। उसी  स्थल पर कामाख्या  मन्दिर का निर्माण किया गया। इस मंदिर के गर्भ गृह में योनि के आकार का एक कुंड  है जिसमे से जल निकलता रहता है। यह योनि कुंड कहलाता है।  यह ...

Maa Shailputri की अराधना से होगी इच्छित वर व नौकरी की प्राप्ति

प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री, अराधना से होगी इच्छित वर व नौकरी की प्राप्ति दुर्गा के पहले स्वरूप में शैलपुत्री मानव के मन पर अधिपत्य रखती हैं। चंद्रमा पर आधिपत्य रखने वाली शैलपुत्री जीव की उस नवजात शिशु की अवस्था को संबोधित करतीं हैं जो अबोध, निष्पाप व निर्मल है। देवी शैलपुत्री मूलतः महादेव कि अर्धांगिनी पार्वती ही है। देवी पार्वती पूर्वजन्म में दक्ष प्रजापति की पुत्री सती थीं तथा उस जन्म में भी वे महादेव की ही पत्नी थीं। सती ने अपने पिता दक्ष के यज्ञ में, महादेव का अपमान न सह पाने के कारण, स्वयं को योगाग्नि में भस्म कर दिया था तथा हिमनरेश हिमावन के घर पार्वती बन कर अवतरित हुईं। पर्वतराज हिमालय के घर पुत्री रूप में उत्पन्न होने के कारण इनका नाम ‘शैलपुत्री’ पड़ा। देवी शैलपुत्री का वर्ण चंद्र के समान है, इनके मस्तक पर स्वर्ण मुकुट में अर्धचंद्र अपनी शोभा बढ़ाता है। ये वृष अर्थात बैल पर सवार हैं अतः इन्हें देवी वृषारूढ़ा भी कहते हैं। इन्होने दाहिने हाथ में त्रिशूल व बाएं हाथ में कमल-पुष्प सुशोभित है। देवी शैलपुत्री की साधना का संबंध चंद्रमा से है। कालपुरूष सिद्धांत के अनुसार कुण्डली में चंद्...

शारदीय नवरात्र 21 सितंबर से, जानें शुभ मुहूर्त के साथ पूजन विधि

शारदीय नवरात्र 21 सितंबर से,   जानें शुभ मुहूर्त के साथ पूजन विधि हिंदू परिवारों में नवरात्रे के पहले दिन घट स्थापना की जाती है, जिसमें ज्वार अर्थात जौ अर्थात खेत्री बीजी जाती है।  जौ जीवन में सुख और शांति का प्रतीक होते हैं क्योंकि देवियों के नौ रूपों में एक मां अन्नपूर्णा का रूप भी होता है। जौ की खेत्री का हरा-भरा होना इस बात का प्रतीक है कि इसी तरह जीवन भी हरा-भरा रहेगा और साथ ही देवी की कृपा भी बनी रहेगी। घट स्थापना सुबह ही करें और इसकी स्थापना हमेशा शुभ मुहूर्त में ही करें।  दुर्गा पूजन का आरंभ घट स्थापना से प्रारंभ हो जाएगा, शारदीय नवरात्र घट स्थापना मुहूर्त- 6:12 से 08:09 अवधि- 1 घण्टा 56 मिनट 20 सितंबर को होगा प्रतिपदा तिथि का प्रारम्भ- 10:59 बजे 21 सितंबर को प्रतिपदा तिथि समाप्त- 10:34 बजे पूजन विधि- सर्वप्रथम स्नान कर गाय के गोबर से पूजा स्थल का लेपन करें। घट स्थापना के लिए एक अलग चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं तथा इस पर अक्षत से अष्टदल बना कर एक बर्तन में जौ बीजें तथा इसके बीच में अपनी इच्छानुसार मिट्टी, तांबे, चांदी या सोने का जल से भरा कलश स्थापित करें। बीजे ह...