अलग-अलग बैंकों में एफडी बनाकर FD Ladder Strategy अपनाना अच्छा रिटर्न और लिक्विडिटी दोनों के लिए
लाभदायक होता है। यह रणनीति ब्याज दरों के उतार-चढ़ाव से बचाती है और जरूरत के समय
आसानी से पैसा उपलब्ध कराती है।
FD Ladder क्या है
यह रणनीति कुल निवेश राशि को
छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर अलग-अलग समयसीमाओं (जैसे 6 महीने, 1 साल, 2 साल, 3 साल) वाली फिक्स्ड डिपॉजिट में लगाने
का तरीका है। हर हिस्सा मैच्योर होने पर नई ब्याज दरों पर दोबारा निवेश किया जाता
है। इससे औसत रिटर्न बेहतर रहता है और लिक्विडिटी बनी रहती है।
कैसे बनाएं स्टेप्स
- कुल राशि (जैसे 10 लाख) को 4-5 बराबर हिस्सों में बांटें।
- हर हिस्से को अलग अवधि की एफडी में लगाएं: 20%
1 साल, 20% 2 साल, आदि।
- अलग बैंकों का चयन करें – बड़े बैंक सुरक्षा
के लिए, छोटे बैंक
ऊंची दरों के लिए।
- मैच्योरिटी पर राशि को फिर से लैडर में
जोड़ें।
रिटर्न बढ़ाने के फायदे
अलग बैंकों से ऊंची ब्याज दरें (जैसे
छोटे फाइनेंस बैंकों में 8-9%) मिलती
हैं। लंबी अवधि की ऊंची दरों का लाभ मिलता है। ब्याज दरें गिरने पर भी पुरानी ऊंची
दर वाली एफडी चलती रहती हैं।
लिक्विडिटी के फायदे
हर 6-12 महीने में कुछ एफडी मैच्योर होती रहती हैं, बिना ब्रेकेज पेनल्टी के पैसा मिल जाता है। जरूरी खर्च के लिए लंबी
एफडी तोड़ने की जरूरत नहीं पड़ती। कई छोटी एफडी से टैक्स डिडक्शन भी कम हो सकता
है।
सावधानियां
प्रत्येक बैंक में 5 लाख तक ही रखें (DICGC इंश्योरेंस)। ब्याज दरें चेक करें। निवेश से पहले KYC और शर्तें पढ़ें। यह सुरक्षित रणनीति है लेकिन
मार्केट लिंक्ड निवेश जितना रिटर्न नहीं देती।
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