बुधवार, 30 अगस्त 2023

New Feature अब कोई दूसरा नहीं खोल पाएगा आपका WhatsApp

अगस्त 30, 2023 0


लाख कोशिशों के बाद भी कोई दूसरा नहीं खोल पाएगा आपका WhatsApp, ऐप इंस्टॉल करते समय बदलें सेटिंग


अगर आप मेटा के लोकप्रिय चैटिंग ऐप का इस्तेमाल करते हैं तो यह आर्टिकल आपके काम का हो सकता है। WhatsApp एक निजी खाता है। इस अकाउंट पर यूजर के पर्सनल के साथ-साथ प्रोफेशनल चैट भी होते हैं।

ऐसे में अगर यूजर का फोन दूसरे के हाथ में आ जाए तो एक टैप पर यह जानकारी सामने आ सकती है। यूजर की इसी जरूरत को समझते हुए वॉट्सऐप पर अकाउंट सिक्यॉरिटी के लिए लॉक का ऑप्शन उपलब्ध है।

WhatsApp का फिंगरप्रिंट लॉक क्या है, कैसे करता है काम?
WhatsApp यूजर के लिए प्रिवेसी फीचर पेश करता है। इन प्राइवेसी फीचर्स में फिंगरप्रिंट लॉक भी है। फिंगरप्रिंट लॉक की मदद से वॉट्सऐप को लॉक किया जा सकता है।

यानी अगर आपकी डिवाइस किसी दूसरे यूजर के हाथ में है तो भी आपकी पर्सनल और प्राइवेट चैट्स को पढ़ा नहीं जा सकता है। फिंगरप्रिंट लॉक इनेबल होने पर वॉट्सऐप खोलने के लिए अपनी उंगली का इस्तेमाल करना जरूरी होता है।

WhatsApp पर फिंगरप्रिंट लॉक कैसे करें?
व्हाट्सएप पर फिंगरप्रिंट लॉक को सक्षम करने के लिए, सबसे पहले आपको ऐप खोलना होगा।
मुख्य पृष्ठ पर, ऊपरी दाईं ओर तीन बिंदुओं पर क्लिक करें।
मेनू विकल्प से, सेटिंग्स पर क्लिक करें।
यहां आपको प्राइवेसी पर क्लिक करना होगा।
नीचे स्क्रॉल करने पर आपको आखिरी में फिंगरप्रिंट लॉक पर क्लिक करना होगा।
यहां अनलॉक विद फिंगरप्रिंट का टॉगल इनेबल करना होगा।
एक बार जब आप फिंगरप्रिंट सक्षम कर लेते हैं, तो आप लॉक के लिए ऑटो समय सेट कर सकते हैं।


व्हाट्सएप ऑटो लॉक के लिए, आप तुरंत, 1 मिनट के बाद और 30 मिनट के बाद विकल्पों में से एक चुन सकते हैं।

फिंगरप्रिंट लॉक के लिए क्या महत्वपूर्ण है?
वॉट्सऐप पर फिंगरप्रिंट लॉक इनेबल करने के लिए जरूरी है कि आपका फिंगरप्रिंट आपके डिवाइस पर पहले से सेव हो। अगर ऐसा नहीं है तो फिंगरप्रिंट को पहले स्मार्टफोन की मेन सेटिंग में जाकर सेव करना होगा।

मंगलवार, 29 अगस्त 2023

RakshaBandhan रात में नहीं मनाना: तो दिन में राखी बांधने का शुभ समय जान लें।

अगस्त 29, 2023 0




रक्षा बंधन रात में नहीं मनाया जाता है तो दिन में राखी बांधने का शुभ समय जान लें।


रक्षा बंधन 2023 तिथि राखी मुहूर्त
इस साल भद्रा के कारण रक्षा बंधन का त्योहार 30 अगस्त और 31 अगस्त को मनाया जा रहा है। राखी बांधने का शुभ समय 30 अगस्त को रात 9 बजे के बाद है, लेकिन जो लोग रात में रक्षाबंधन नहीं मनाना चाहते, वे दिन में भी रक्षाबंधन का त्योहार मना सकते हैं, लेकिन वह दिन 31 अगस्त का होगा. उस दिन आप भद्रा के भय से मुक्त हो जाएंगे और पूरे दिन राखी बांधने का शुभ समय मिलेगा। जानते हैं 30 और 31 अगस्त को कब से है रक्षाबंधन का शुभ मुहूर्त?

31 अगस्त को पूरे दिन रक्षाबंधन मुहूर्त है

रक्षाबंधन का त्योहार सदैव सावन पूर्णिमा की उदया तिथि पर मनाना उचित रहता है। इस साल सावन पूर्णिमा की उदया तिथि 31 अगस्त, गुरुवार को है। ऐसे में 31 अगस्त को भी रक्षाबंधन मनाना ठीक है.

31 अगस्त को राखी बांधने का शुभ समय सुबह 05:55 बजे से सुबह 07:05 बजे तक है. रक्षाबंधन के लिए यह सबसे अच्छा शुभ समय है। इसके बाद आप सुबह 08:12 बजे से शाम 05:42 बजे के बीच कभी भी राखी बांध सकती हैं। इस दौरान रक्षाबंधन मनाने से कोई दोष नहीं लगेगा. यह रक्षाबंधन का सामान्य शुभ मुहूर्त है। इस दिन सुकर्मा योग सुबह से शाम 05:16 बजे तक है.

30 अगस्त को राखी बांधने का शुभ समय क्या है?

सावन पूर्णिमा तिथि 30 अगस्त को सुबह 10:58 बजे से शुरू हो रही है और इसके साथ ही भद्रा भी शुरू हो रही है। भाद्र पूर्णिमा तिथि आरंभ से रात्रि 09:01 बजे तक। जो लोग 30 अगस्त को राखी बांधना चाहते हैं उनके लिए शुभ समय रात 09:01 बजे के बाद है। रक्षाबंधन के लिए यह सबसे अच्छा शुभ समय है।


रक्षाबंधन का ज्योतिषीय नियम क्या है?

ज्योतिषीय नियमों के अनुसार रक्षाबंधन पर्व के लिए सावन की पूर्णिमा के दिन कम से कम त्रिमुहूर्त व्यापिनी का होना आवश्यक है। सामान्य भाषा में समझें तो पूर्णिमा तिथि पर सूर्योदय के बाद 144 मिनट तक मुहूर्त का होना आवश्यक माना जाता है। तभी उस पूर्णिमा तिथि पर रक्षाबंधन मनाना उचित होता है।

लेकिन इस साल अगर 30 अगस्त की रात में रक्षाबंधन का जश्न किरकिरा न हो तो 31 अगस्त को भी रक्षाबंधन मनाया जा सकता है. उस दिन आपको रक्षाबंधन का मध्यम और सामान्य मुहूर्त मिल रहा है। जब स्थिति सामान्य न हो तो विकल्प चुनना मजबूरी बन जाता है।

मंगलवार, 15 अगस्त 2023

Tulsi Puja के लिए रविवार को क्यों अशुभ माना जाता है

अगस्त 15, 2023 0


तुलसी पूजा रविवार को क्यों नहीं की जाती? 

तुलसी हिंदू धर्म में एक पवित्र पौधा है और इसे भगवान विष्णु की पत्नी देवी लक्ष्मी का अवतार माना जाता है। तुलसी पूजा हर दिन तुलसी के पौधे की पूजा करने और उसे जल चढ़ाने का एक अनुष्ठान है। हालाँकि, कुछ दिन और समय ऐसे भी होते हैं जब तुलसी पूजा वर्जित होती है या टाली जाती है। आइए मैं इसके पीछे के कारण बताता हूं।


कुछ धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान विष्णु को तुलसी बहुत प्रिय है और इसकी पूजा से वे प्रसन्न होते हैं। वैसे तो गुरुवार विष्णु पूजा के लिए सबसे शुभ दिन है, लेकिन कुछ लोग रविवार को भी उनका पसंदीदा दिन मानते हैं। वहीं तुलसी भी विष्णु भक्त हैं और रविवार के दिन उनकी भक्ति में लीन रहती हैं। उनकी साधना में विघ्न न पड़े इसलिए रविवार को तुलसी पूजा नहीं की जाती। यह भी कहा जाता है कि रविवार को तुलसी के पौधे को पानी देने से भगवान विष्णु नाराज हो सकते हैं और भक्त पर दुर्भाग्य आ सकता है।

रविवार को तुलसी पूजा न करने का एक अन्य कारण यह है कि रविवार का स्वामी सूर्य देव हैं, जिन्हें पौधों के स्वामी शनि का शत्रु माना जाता है। चूंकि तुलसी एक पौधा है, इसलिए ऐसा माना जाता है कि रविवार को इसे पानी देने से इसे नुकसान हो सकता है या यह मुरझा सकता है। इसलिए, पौधे को सूर्य के नकारात्मक प्रभाव से बचाने के लिए रविवार को तुलसी पूजा से परहेज किया जाता है।

रविवार के अलावा कुछ अन्य दिन और अवसर भी हैं जब तुलसी पूजा नहीं की जाती है। इनमें एकादशी (चंद्र पखवाड़े का ग्यारहवां दिन), संक्रांति (सूर्य का एक राशि से दूसरी राशि में संक्रमण), सूर्य और चंद्र ग्रहण और शाम का समय शामिल है। इन दिनों में तुलसी के पत्ते तोड़ना भी वर्जित है, क्योंकि इससे अपमान या पाप लग सकता है। एकमात्र अपवाद देवउठनी एकादशी है, जब तुलसी और विष्णु का विवाह समारोह बहुत धूमधाम और खुशी के साथ मनाया जाता है।


तुलसी पूजा भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी के प्रति अपनी भक्ति व्यक्त करने का एक सरल लेकिन शक्तिशाली तरीका है। इससे भक्त को स्वास्थ्य, धन, शांति और खुशी जैसे कई लाभ भी मिलते हैं। हालाँकि, तुलसी पूजा करते समय कुछ नियमों और विनियमों का पालन करना चाहिए, जैसे पौधे को छूने से पहले स्नान करना, बिना किसी उद्देश्य के पत्ते नहीं तोड़ना, घर पर सूखा या मृत पौधा नहीं रखना आदि। 

सोमवार, 14 अगस्त 2023

15 August देशभक्ति के लिए समर्पित दिन: Swatantrata Diwas पर शायरी

अगस्त 14, 2023 0


15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस पर शायरी

15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस,
हर्ष और उल्लास का दिन,
यह दिन हम सभी को याद दिलाता है,
कि हम स्वतंत्र और गौरवशाली देश के नागरिक हैं.
इस दिन को मनाने के लिए,
हम सभी को एक साथ आना चाहिए,
और देश के लिए अपना योगदान देना चाहिए.
हमें देश की एकता और अखंडता को बनाए रखना चाहिए,
और देश को एक समृद्ध और शक्तिशाली राष्ट्र बनाना चाहिए.



इस दिन को मनाने के लिए,
हम सभी को एक साथ मिलकर,
देश के लिए कुछ न कुछ करना चाहिए.
हम सभी को देश के लिए अपना सर्वस्व समर्पित करना चाहिए,
और देश को एक महान राष्ट्र बनाना चाहिए.

स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं!

स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं शायरी 

स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं,
हम सभी को आज़ादी का जश्न मनाना चाहिए.
हमारे देश के लिए लड़ने वाले सभी शहीदों को याद रखें,
और उनके सपनों को पूरा करने का वादा करें.

आज, आइए हम एक साथ आएं,
और अपने देश के लिए एक बेहतर भविष्य का निर्माण करें.
आइए हम एकता और शांति का जश्न मनाएं,
और एक ऐसे देश का निर्माण करें जहां हर कोई सम्मान और समानता के साथ जी सके.

स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं,
हम सभी को खुशी और समृद्धि का जश्न मनाना चाहिए.
आइए हम अपने देश के लिए गर्व और समर्पण का जश्न मनाएं,
और एक ऐसे देश का निर्माण करें जहां हर कोई स्वतंत्र और सुरक्षित हो सके.

15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस पर शायरी 

स्वतंत्रता दिवस

आज हम मनाते हैं स्वतंत्रता दिवस,
जिस दिन हमने अंग्रेजों से आजादी पाई थी.
यह एक दिन है जब हम अपने देश के लिए गर्व महसूस करते हैं,
और अपने शहीदों को याद करते हैं.

हमारे देश के लिए लड़ने वाले सभी शहीदों को सलाम,
जिन्होंने अपना खून बहाया और अपनी जान दी.
आपके बलिदान के कारण ही आज हम स्वतंत्र हैं,
और हम आपका सम्मान करते हैं.

आज हम एकजुट होकर अपने देश के विकास के लिए काम करेंगे,
और एक ऐसे देश का निर्माण करेंगे जहां हर कोई खुशहाल और समृद्ध हो.

स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं!


TIRANGE JHANDE per kuchh shayri hai:

* **Tirange Jhande**

Tirange Jhande, tu pyar aur shanti ka mela hai,
tu shakti aur shakti ka mela hai,
tu ek janata ka mela hai
jo ek hi bharat ke liye ladti hai.

Tirange Jhande, tu azadi aur kranti ka mela hai,
tu ek naye bhavishya ka mela hai,
tu ek aisa bhavishya jo ek janata ke liye achcha hai
jo ek hi bharat ke liye ladti hai.

Tirange Jhande, tu hamare sapnon ka mela hai,
tu hamare ashaon ka mela hai,
tu hamare vishvas ka mela hai
ki ek din hamare sapne sakar ho jaenge
aur hamare ashaon ko pura kar diya jaega.

Tirange Jhande, tu hamare dil ka mela hai,
tu hamare jaan ka mela hai,
tu hamare bharat ka mela hai,
aur ham tumhare liye ek janata hain.

DESH MERA PYARA HAI
mera desh pyara hai,
ismein sab kuchh hai jo mujhe chahie.
yahan ke log milane-julne wale hain,
yahan ki hawa sundar hai,
aur yahan ki zameen khubsurat hai.

mujhe apne desh per garv hai,
aur main ise hamesha pyar karunga.
mujhe ummid hai ki mere desh ka bhavishya achcha hoga,
aur main ise ek behtar jagah banane mein madad karunga.

mujhe apne desh mein rahne ke liye bahut khushi hai,
aur main apne desh ke liye apni jaan bhi de sakta hun.
mujhe apne desh per garv hai,
aur main ise hamesha pyar karunga.
jaroor, yahan desh prem per kuchh shayri hai:

* **desh prem**

Desh prem ek bhavna hai
jo hamare dil mein rahti hai,
yah hamen vishwas deti hai
ki ham hamesha ekenge.

Desh prem ek shakti hai
jo hamen aage badhati hai,
yah hamen ladne ki takat deti hai
jab ham bahut kamjor mahsus karte hain.

Desh prem ek lakshya hai
jo ham hamesha dhyan mein rakhte hain,
yah hamen aasha deti hai
ki ek din hamare sapne sakar ho jaenge.

DESH PREM SHAYRI
Desh prem ek dhan hai
jo hamen khush karta hai,
yah hamen garv aur shakti ka ehsas deta hai.

Desh prem ek mulyvan bhavna hai
jo ham hamesha sajha karte hain,
yah hamen ek janata banata hai
aur hamen ek vishwas banata hai.

* **swatantrata diwas**

Swatantrata diwas hai,
ek khushi ka din,
jab ham apne desh ko salam karte hain.
ham unki yad karte hain jinhone apna khoon baha diya,
taaki ham azad ho saken.

Ham apna rishta apne desh se salamat rakhte hain,
aur ham iske liye apna sabse achcha karenge.
ham apna desh viksit karna chahte hain,
aur ham iske liye kam karenge.

Swatantrata diwas hai,
ek din kahani sunane ka,
aur use yad karne ka ki ham kitne khushkismat hain.
ham apne desh ko hamesha pyar karenge,
aur ham iske liye hamesha ladenge.

MERA DESH SHAYRI

Mera desh hai ek khubsurat desh,
jiska itihaas bahut purana hai.
yahan ki zameen bahut achhi hai,
aur yahan ki hawa bahut sundar hai.

Yahan ke log bahut milane-julne wale hain,
aur yahan ka khana bahut swadisht hai.
mujhe apne desh per bahut garv hai,
aur main ise hamesha pyar karunga.

* **desh ka anand**

Desh ka anand lene ke liye,
hamein ek sath rahna hoga.
hamein ek-dusre ki madad karni hogi,
aur hamein ek-dusre ke sath samjhdaar hona hoga.

Desh ka anand lene ke liye,
hamein hamare desh ki shan aur shakti ko badhava dena hoga.
hamein hamare desh ke liye kam karna hoga,
aur hamein hamare desh ke liye ladna hoga.

Desh ka anand lene ke liye,
hamen hamesha apne desh ki yad rakhni hogi.
hamen hamesha apne desh ko pyar karna hoga,
aur hamesha apne desh ke liye ladna hoga

15 August: स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं



बुधवार, 9 अगस्त 2023

Parma Ekadashi Vrat सुख-समृद्धि और ऐश्वर्य प्रदान करता है

अगस्त 09, 2023 0


परमा एकादशी व्रत एक महत्वपूर्ण हिंदू व्रत है जो हर साल ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को रखा जाता है. यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है और इसे रखने से सभी पापों से मुक्ति मिलती है और मोक्ष की प्राप्ति होती है.


परमा एकादशी व्रत की कथा के अनुसार, एक बार एक राजा थे जिनका नाम धर्मपाल था. वे बहुत धार्मिक और पुण्यात्मा थे. एक दिन उन्होंने एक ऋषि से परमा एकादशी व्रत के बारे में सुना. ऋषि ने उन्हें बताया कि यह व्रत बहुत ही शक्तिशाली है और इसे रखने से सभी पापों से मुक्ति मिलती है.

राजा धर्मपाल ने ऋषि के बताए अनुसार परमा एकादशी व्रत रखा. उन्होंने व्रत के दिन उपवास किया और भगवान विष्णु की पूजा की. उन्होंने भगवान विष्णु से प्रार्थना की कि वे उन्हें सभी पापों से मुक्ति दिलाएं और मोक्ष प्रदान करें.

व्रत के बाद राजा धर्मपाल को स्वर्ग की प्राप्ति हुई. वे सभी पापों से मुक्त हो गए और मोक्ष प्राप्त कर लिया.

परमा एकादशी व्रत रखने के कुछ नियम हैं. इस व्रत को रखने वाले व्यक्ति को एक दिन पहले से ही सात्विक भोजन करना शुरू कर देना चाहिए. व्रत के दिन सुबह उठकर स्नान करना चाहिए और भगवान विष्णु की पूजा करनी चाहिए. व्रत के दिन उपवास करना चाहिए और दिन भर भगवान विष्णु का नाम जप करना चाहिए. शाम को भगवान विष्णु की पूजा करनी चाहिए और प्रसाद ग्रहण करना चाहिए.

परमा एकादशी व्रत रखने से सभी पापों से मुक्ति मिलती है और मोक्ष की प्राप्ति होती है. यह व्रत बहुत ही शक्तिशाली है और इसे हर व्यक्ति को एक बार अवश्य रखना चाहिए.


2023 में परम एकादशी 12 अगस्त को है. यह एकादशी कृष्ण पक्ष की एकादशी है और इसे परम एकादशी इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह सभी एकादशियों में सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है. इस दिन भगवान विष्णु की पूजा की जाती है और व्रत रखा जाता है. इस व्रत को रखने से सभी पापों से मुक्ति मिलती है और मोक्ष की प्राप्ति होती है.

परमा एकादशी व्रत के कुछ लाभ हैं:
  • सभी पापों से मुक्ति मिलती है.
  • मोक्ष की प्राप्ति होती है.
  • सुख-समृद्धि और ऐश्वर्य प्राप्त होता है.
  • सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं.
  • रोगों से मुक्ति मिलती है.
  • दीर्घायु प्राप्त होती है.
  • परिवार में सुख-शांति बनी रहती है.
परमा एकादशी व्रत एक बहुत ही महत्वपूर्ण और लाभकारी व्रत है. इसे हर व्यक्ति को एक बार अवश्य रखना चाहिए.

गुरुवार, 3 अगस्त 2023

Raksha Bandhan पर बहन को राशि के अनुसार दें Gift

अगस्त 03, 2023 0


रक्षाबंधन पर अपनी बहन को राशि के अनुसार ऐसे उपहार दें

हिंदू कैलेंडर के अनुसार श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन रक्षाबंधन मनाया जाता है। यह त्यौहार भाई-बहन के प्यार का प्रतीक माना जाता है। रक्षाबंधन के दिन बहनें अपने भाई की कलाई पर रक्षासूत्र बांधती हैं और सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। वहीं, भाई अपनी बहन की रक्षा करने का वादा करता है और उसे उपहार के रूप में पैसे देता है।

लेकिन ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस राखी पर आपको अपनी बहन को उसकी राशि के अनुसार क्या उपहार देना चाहिए? जिससे उनके जीवन में सुख और समृद्धि बनी रहे। आइए जानते हैं कि एक भाई को अपनी बहनों को राशि के अनुसार क्या उपहार देना चाहिए।

मेष राशि का स्वामी बृहस्पति मंगल है। इस राशि का शुभ रंग लाल है। ऐसे में आप रक्षाबंधन के दिन अपनी बहन को लाल रंग की कोई चीज गिफ्ट कर सकते हैं। जो अत्यंत शुभ रहेगा.

वृषभ राशि का स्वामी बृहस्पति है। इस राशि का शुभ रंग सफेद और सिल्वर है। अगर आप रक्षाबंधन में अपनी बहन को उपहार देने की सोच रहे हैं तो आप सफेद या चांदी से जुड़ी चीजें उपहार में दे सकते हैं।

मिथुन राशि के स्वामी बृहस्पति, बुध हैं। इस राशि की बहनों को हरे रंग की कोई वस्तु उपहार में दें। आप हरे रंग से जुड़ी कोई ड्रेस या कोई चीज गिफ्ट कर सकते हैं।

कर्क राशि का स्वामी बृहस्पति चंद्रमा है। आप अपनी बहन को टैको सफेद रंग की चीज जैसे मोतियों का हार उपहार में दे सकते हैं और अपनी बहन को सफेद रंग की मिठाई खिला सकते हैं।

सिंह राशि के स्वामी गुरु सूर्यदेव हैं। आप अपनी बहनों को पीले या सुनहरे रंग की वस्तुएं उपहार में दे सकते हैं। इससे भाई-बहन के रिश्ते मजबूत होंगे।


यह भी पढ़ें: Raksha Bandhan पर पूरे दिन रहेगा भद्रा का साया, नोट कर लें राखी बांधने का शुभ समय 

कन्या राशि के स्वामी बृहस्पति, बुध हैं। इसलिए आप अपनी बहनों को पन्ना की अंगूठी या भगवान गणेश की मूर्ति उपहार में दे सकते हैं।

तुला राशि का स्वामी बृहस्पति है। इस राशि की बहनों को अपने भाईयों को चांदी के आभूषण या रेशमी वस्त्र उपहार में देने चाहिए। ये आपके लिए बेहद शुभ रहेगा.

वृश्चिक राशि का स्वामी बृहस्पति मंगल है, अगर आपकी बहन इस राशि की है तो आप उसे रक्षाबंधन के दिन बूंदी खिलाएं और साथ में लाल रंग की चुनरी चढ़ाएं।

धनु राशि का स्वामी बृहस्पति है। इसलिए आपको अपनी बहन को पीले या केसरिया रंग की पोशाक उपहार में देनी चाहिए।

मकर राशि का स्वामी शनि है। अगर आपकी बहन की राशि मकर है तो उसे मोबाइल गिफ्ट करें।

कुंभ राशि का स्वामी गुरु शनि देव को माना जाता है। तो आप अपनी बहन को कोई काला रंग गिफ्ट कर सकते हैं।

मीन इस राशि का स्वामी बृहस्पति है। अगर आपकी बहन की राशि मीन है तो उसे पीतल की वस्तुएं दें। आप अपनी बहन को पीले रंग की कोई वस्तु उपहार में दे सकते हैं। इस राशि की लड़कियों को घूमना बहुत पसंद होता है इसलिए आप इन्हें घुमाने ले जा सकते हैं।

बुधवार, 2 अगस्त 2023

आज जानेंगे क्यों थी Bhagwan Krishan की 16,000 पत्नियां

अगस्त 02, 2023 0
आज जानेंगे क्यों थी Bhagwan Krishan की 16,000 पत्नियां
शास्त्रों में इस बात का उल्लेख है कि भगवान कृष्ण की 16,000 पत्नियां थी। वास्तव में उनकी 16,108 पत्नियां थी। हम सभी जानते हैं कि प्राचीन काल में बहुविवाह प्रथा बहुत लोकप्रिय थी, फिर भी 16,108 की संख्या बहुत अधिक लगती है।

राधा के साथ उनका आत्मिक प्रेम, आठ सुन्दर राजकुमारियों से विवाह तथा फिर भी 16,000 और अधिक पत्नियां निश्चित रूप से हमें आश्चर्यचकित कर यह जानने के लिए मजबूर कर देते हैं कि इन सब के पीछे क्या कारण होगा। यदि हम शास्त्रों में देखें तो हम देखेंगे कि भगवान कृष्ण ने राधा से कभी भी विवाह नहीं किया था।

परन्तु उन्होंने आठ महिलाओं से शादी की। उनकी आठ पत्नियों के नाम रुक्मिणी, सत्यभामा, जाम्बवती, कालिंदी, मित्रविंदा, नाग्नाजिती, भद्रा और लक्ष्मणा थे। उनमें से सत्यभामा और रुक्मिणी प्रसिद्ध हैं।




अब 16,000 पत्नियों की कहानी की ओर बढ़ते हैं। हम सभी जानते हैं कि भगवान कृष्ण एक चमत्कारी राजा थे। उनके साथ जो कुछ भी हुआ उसके पीछे कोई न कोई कारण था। अत: यह कहना सही नहीं होगा कि 16,108 पत्नियां कृष्ण लीला का एक हिस्सा थी। अत: ऐसी क्या परिस्थिति हुई कि भगवान कृष्ण को 16,000 महिलाओं से विवाह करना पड़ा? आइए देखें।नरकासुर की कहानी। 

नरकासुर प्रग्ज्योतिषा का राजा था। यह स्थान अब असम के नाम से जाना जाता है। वह विष्णु के सूअर अवतार वराह और पृथ्वी की देवी भूमि देवी का पुत्र था। भूमि का पुत्र होने के कारण उसे भौम या भौमासुर भी कहा जाता था। उसने स्वर्ग, धरती और पाताल तीनों विश्व पर कब्ज़ा कर लिया था। उसने पृथ्वी पर जिन 16,000 देशों पर विजय प्राप्त की थी उन देशों की राजकुमारियों को कैद कर लिया था। स्वर्ग में उसने स्वर्ग और देवों के देव इंद्रदेव की मां अदिति के कान के बाले (इयररिंग) चुराए। पाताल में उसने पानी के देवता वरुण का शाही छाता चुरा लिया।

उसने राजकुमारियों को एक पर्वत पर बंदी बना कर रखा। इसी दौरान इंद्र ने अदिति के कान के बाले वापस लाने तथा विश्व को इस राक्षस की क्रूरता से मुक्ति दिलाने के लिए भगवान कृष्ण से नरकासुर के साथ युद्ध करने की याचना की। अत: भगवान कृष्ण ने राक्षस का वध कर दिया।

नरकासुर की मृत्यु के पश्चात भूमि देवी ने सभी चुराई हुई चीज़ें कृष्ण को वापस कर दीं जिसमें 16,000 महिलायें भी शामिल थी। श्री कृष्ण ने उन्हें मुक्त कर दिया परन्तु उन महिलाओं से इसका पालन नहीं किया।



नरकासुर की कैद में रहने वाली 16,108 महिलाओं ने भगवान कृष्ण से प्रार्थना की कि वे उन सभी को अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार कर लें।

16,108 पत्नियां अत: भगवान कृष्ण ने उन सभी से विवाह कर लिया। भागवत पुराण में विवाह के बाद कृष्ण की पत्नियों के जीवन के बारे में बताया गया है। प्रत्येक पत्नी को एक घर और सौ दासियाँ दी गयी थीं। कृष्ण ने स्वयं को कई रूपों में बाँट लेते थे तथा इस प्रकार रात में प्रत्येक पत्नी के साथ रहते थे। सुबह उनके सभी रूप मिलकर कृष्ण बन जाते और वे द्वारका के राजा रूप में आ जाते। कृष्ण की प्रत्येक पत्नी व्यक्तिगत तौर पर उन्हें नहला कर, सजा कर, पंखा झलकर, उन्हें उपहार और फूलों की माला देकर उनकी पूजा करती थी।

भगवान कृष्ण को सर्वशक्तिमान माना जाता है जो किसी न किसी रूप में अपने भक्तों के साथ रहते हैं जैसे वे अपनी 16,108 पत्नियों के साथ रहते थे।